Giloy ke Fayde | आयुर्वेद का अनमोल खजाना है गिलोय, जानिए खाने का सही तरीका और लाभ

आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों में गिलोय एक अनमोल खजाना है। गिलोय अपने औषधीय गुणों की वजह से कई बीमारियों में रामबाण ईलाज साबित होता है। गिलोय शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालता है, ब्लड को साफ करता है और बैक्टीरिया से लड़कर शरीर की रक्षा करता है। साथ ही यह डेंगू, स्वाइन फ्लू और मलेरिया जैसी जानलेवा बुखार में भी राहत पहुंचाने का काम करता है। यही वजह है की आयुर्वेद में इसे अमृत माना गया है। आइए आयुर्वेदिक डॉक्टर अमित अवस्थी से जानते हैं की Giloy ke Fayde कौन से हैं और इसका सेवन किस तरह किया जाना चाहिए।

giloy leaf

गिलोय के फायदे -Giloy ke fayde

डेंगू (Giloy benefits for dengue)

गिलोय का सेवन डेंगू से बचाव के लिए कारगर उपाय है। इसमें मौजूद एंटीपायरेटिक गुण बुखार में राहत पहुंचाने का काम करता है। इसके साथ ही यह इम्युनिटी बूस्टिंग में भी मदद करता है और इम्युनिटी बढ़ने के साथ ही हमारा शरीर डेंगू जैसे बुखार से लड़ने में भी सक्षम हो पाता है।

ये है सेवन का तरीका : डेंगू होने पर गिलोय जूस (Giloy juice) को दो से तीन चम्मच लें और इसे एक कप पानी में मिलाकर रख लें। खाना खाने से एक-डेढ़ घंटे पहले दिन में दो बार इस जूस को लिया जा सकता है।

डायबिटीज (Giloy benefits for diabetes)

गिलोय में एंटी-हाइपरग्लाइसेमिक यानी ब्लड शुगर को कम करने वाले तत्व मौजूद होते हैं। ये तत्व टाइप-2 डायबिटीज को नियंत्रित रखने में असरदायक साबित होते हैं। यही कारण है कि डायबिटीज के मरीजों को खासतौर पर गिलोय का जूस लेने की सलाह दी जाती है।

ये है सेवन का तरीका : सुबह खाली पेट एक कप पानी में दो से तीन चम्मच गिलोय जूस मिलाकर पीने से डायबिटीज के मरीजों को खास लाभ मिलता है।

पाचन सुधारे (Giloy benefits for indigestion)

कब्ज, एसिडिटी , गैस और पेट फूलने की समस्या को दूर करने में गिलोय आपकी मदद कर सकता है। दरअसल गिलोय का तना पाचन तंत्र को मजबूती प्रदान करता है जिससे अपच से जुड़ी हर तरह की समस्याओं से छुटकारा मिल जाता है।

ये है सेवन का तरीका :  थोड़े से आंवले के साथ आधा ग्राम गिलोय का चूर्ण नियमित रूप से ले सकते हैं, या कब्ज के इलाज के लिए गुड़ के साथ लेना भी लाभकारी है।

बुखार (Giloy benefits for fever)

गिलोय के तने और पत्तियों को इस्तेमाल में लेकर आप पुराने से पुराने बुखार से छुटकारा पा सकते हैं। दरअसल गिलोय या गुडूची (Guduchi) में ऐसे एंटीपायरेटिक गुण होते हैं जो मलेरिया, डेंगू और स्वाइन फ्लू जैसे गंभीर रोगों में होने वाले बुखार से राहत दिलाने में कारगर साबित होते हैं।

ये है सेवन का तरीका : गिलोय घनवटी (1-2 टैबलेट) पानी के साथ दिन में दो बार खाने से किसी भी तरह के बुखार में राहत मिल सकती हैं। मगर बुखार में गिलोय की टेबलेट के इस्तेमाल से पहले एक बार अपने डॉक्टर से राय जरूर लें।

गठिया (Giloy benefits for rheumatoid arthritis)

गिलोय में एंटी इंफ्लेमेटरी और एंटी अर्थराइटिक गुण गठिया के ईलाज में मददगार साबित होते हैं। इसमें मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण सूजन को कम करता है तो एंटी-अर्थराइटिक और एंटी-ऑस्टियोपोरोटिक गुण जोड़ों के दर्द को दूर भगाता है।

ये है सेवन का तरीका : अर्थराइटिस की समस्या से राहत पाने के लिए गिलोय पाउडर को दूध में उबालकर पीना फायदेमंद होता है। इसके साथ ही गिलोय जूस और गिलोय का काढ़ा पीना भी उपयोगी माना जाता है।

इम्युनिटी बूस्टर (Giloy increase immunity)

गिलोय शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभाता है। नियमित रूप से गिलोय का जूस पीने से शरीर में रोगों से लड़ने की शक्ति पैदा हो जाती है। जिससे हमारा शरीर बार-बार बीमारियों की चपेट में नहीं आता है। इम्युनिटी बढ़ने से सर्दी-जुकाम समेत कई तरह की संक्रामक बीमारियों से बचाव हो पाता है।

ये है सेवन का तरीका : दिन में दो बार दो से तीन चम्मच (10-15ml) गिलोय जूस पीने से धीरे-धीरे आपकी इम्युनिटी स्ट्रांग बनती जाएगी।

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इन पौष्टिक तत्वों से भरपूर है गिलोय – Giloy Nutritional Value in Hindi

  • क्विनोन्स
  • पॉलीफेनोल्स और टैनिन
  • टरपेनोइड्स और एसेंशियल ऑयल्स
  • लैक्टिक और पॉलीपेप्टाइड
  • सैपोनिन्स
  • फ्लेवेनॉइड
  • कूमैरिन्स
  • अल्कालोइड्स
  • ग्लाइकोसाइड

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आयुर्वेद के अनुसार ऐसे करना चाहिए गिलोय का सेवन – How to Use Giloy in Hindi

  1. सुबह गिलोय के जूस के साथ दिन की शुरुआत को सबसे उत्तम माना गया है। गुनगुने पानी में 10मि.ली गिलोय के जूस को मिलाएं और इसे पी लें।
  2. सुबह शहद और गर्म पानी के साथ भी इसका सेवन लाभकारी माना जाता है। गुनगुने पानी में 1 टीस्पून गिलोय पाउडर और थोड़ा शहद मिलाएं। अब इसे सुबह खाली पेट पी लें।
  3. तुलसी, हल्दी और लौंग के साथ कुछ पत्तियां गिलोय की मिलाकर काढ़ा भी बनाकर पी सकते हैं।
  4. रातभर गिलोय की पत्तियों और तने को भिगोकर रख दें। सुबह इन पत्तियों और तने को कूटकर थोड़ी देर इस पेस्ट को उबाल लें और फिर इसे छानकर पी सकते हैं।
  5. जोड़ों के दर्द को दूर करने के लिए गिलोय को दूध में उबालकर पीना लाभदायक माना जाता है।
  6. अदरक के साथ गिलोय का सेवन करने से रूमेटाइड अर्थराइटिस जैसी दिक्कतों से निजात मिल सकेगी।
  7.  अस्थमा के रोगियों के लिए गिलोय के तने को चबाकर खाना भी फायदेमंद होता है।
  8.  इम्यूनिटी बढ़ाना चाहते हैं तो गिलोय को आंवला, अदरक और काले नमक में मिलाकर पियें।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न 

प्रश्न- गिलोय का सेवन कब नहीं करना चाहिए?

डायबिटीज और शुगर लो होने पर आयुर्वेद में गिलोय का सेवन वर्जित बताया गया है। दरअसल इसमें कुछ ऐसे तत्व होते हैं जिनसे शुगर का लेवल और ज्यादा डाउन हो सकती है। इसके साथ ही प्रेगनेंसी में भी गिलोय का सेवन करने से बचना चाहिए।

प्रश्न- गिलोय के साइड इफेक्ट क्या है?

जी हां, गिलोय का लगातार ज्यादा सेवन आपको दिक्कत में डाल सकता है। गिलोय के ज्यादा सेवन से दस्त लगने की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। दरअसल गर्म तासीर के कारण इसकी अधिक मात्रा पेट से संबंधित जलन और गैस की समस्या का कारण बन सकता है। साथ ही यह ब्लड प्रेशर को कम करने का काम करता है इसलिए किसी भी तरह की सर्जरी से पहले इसका सेवन न करें।

प्रश्न-गिलोय लेने का सबसे अच्छा समय क्या है?

सुबह के समय गिलोय के सेवन को सबसे हितकारी बताया गया है। मगर अगर आप गिलोय का नियमित सेवन करने के बारे में सोच रहे हैं तो एक बार डॉक्टर से परामर्श जरूर लें और डॉक्टर द्वारा बताई गई मात्रा का ही नियमित सेवन करें।

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