Gharelu Nuskhe: मानसून में इम्यूनिटी बूस्टर का काम करती है ये 7 शक्तिशाली आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां

भारी गर्मी के बाद बरसात का मौसम एक बड़ी राहत लेकर आता है। मगर अगर सेहत के लिहाज से देखा जाए तो यह मौसम कई तरह की बीमारियों को भी दावत देने का काम करता है। इस मौसम में बरती गई थोड़ी सी असावधानी से सर्दी-जुकाम, फूड पॉइजनिंग, डेंगू, मलेरिया, टाइफाइड और हेपेटाइटिस-ए जैसी बीमारियां अपनी चपेट में ले लेती हैं। आज हम आपको कुछ ऐसे Gharelu Nuskhe बताने वाले हैं जिन्हें आजमाकर आप बारिश के मौसम में होने वाले संक्रमण से बच पाएंगे। दरअसल हम ऐसी 5 कारगर जड़ी बूटियों के बारे में बताने वाले हैं जो आपकी इम्युनिटी को मजबूती देंगे। जिससे आपका शरीर बरसात में होने वाली किसी भी बीमारी का डटकर मुकाबला कर सकने में सक्षम होगा।

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आजमाएं इन 7 जड़ी बूटियों के Gharelu Nuskhe 

तुलसी (Basil)

तुलसी आयुर्वेद की सबसे प्राचीन और प्राकृतिक औषधि है। इसके पत्तों में विटामिन ए, विटामिन के, कैल्शियम, आयरन, मैंगनीज, मैग्नीशियम, जिंक और पोटेशियम जैसे पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में मिलते हैं। तुलसी फेफड़ों से संबंधित बीमारियों जैसे अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, फ्लू आदि से राहत दिलाने में मददगार साबित होती है।

ऐसे करें इस्तेमाल- आप तुलसी से बनी चाय का सेवन कर सकते है। यह सांस और सर्दी-खांसी से जुड़ी समस्याओं को दूर करती है। साथ ही अगर आप रोजाना तुलसी ( खाली पेट)  के चार-पांच पत्तों का सेवन करें तो कई रोगों से अपना बचाव कर सकते हैं।  तुलसी का काढ़ा बनाने के लिए दो कप पानी में तुलसी की कुछ पत्तियां डालकर 10-15 मिनट तक पानी उबालें।  अब इस पानी को चाय की तरह की चुस्कियां लेकर पी सकते हैं।

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अश्वगंधा (Ashwagandha)

अश्वगंधा कई शक्तिशाली गुणों को खुद में सहेजे हैं। इसमें कई ऐसे पोषक तत्व और औषधीय गुण होते हैं जो इम्यूनिटी को बूस्ट करते हैं। यह शरीर में कोर्टिसोल (तनाव हार्मोन) के उत्पादन को मैनेज करके रखता है। जिससे मेंटल हेल्थ पर बहुत ही अच्छा प्रभाव पड़ता है। इसके साथ ही यह ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल रखता है और मांसपसियों को मजबूती प्रदान करता है।

ऐसे करें इस्तेमाल- अश्वगंधा को आप दूध या पानी के साथ ले सकते हैं। साथ ही अश्वगंधा का सेवन चूर्ण या कैप्सूल के रूप में भी किया जा सकता है। कुछ खास बीमारी और परिस्थिति में अश्वगंधा नुकसान भी पहुंचा सकता है। इसलिए किसी आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह के बाद ही इसे लें।

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मुलेठी (Mulethi )

मुलेठी में एंटीऑक्सीडेंट, एंटी-माइक्रोबियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण भरपूर मात्रा में मिलते हैं। गले का इंफेक्शन, गले में दर्द या सूजन से बचने के लिए रोज मुलेठी का सेवन किया जा सकता है। मुलेठी का सेवन करके आप कई तरह की बीमारियों और संक्रमण से खुद का बचाव कर सकते हैं।

ऐसे करें इस्तेमाल- मुलेठी का पानी बनाने के लिए आप 1 गिलास गुनगुने पानी में 1 चम्मच मुलेठी पाउडर मिला लें और फिर इसे चाय की तरह धीरे-धीरे पी जाएं। आप इसका इस्तेमाल चाय के साथ भी कर सकते हैं।  

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नीम (Neem)

आयुर्वेद में नीम की गिनती एक शक्तिशाली जड़ी-बूटी के रूप में की जाती है। नीम ब्लड को साफ करने में मददगार साबित होता है। नीम में फंगस, वायरस और बैक्टीरिया से लड़ने की पूरी ताकत होती है। यह पाचन तंत्र को भी मजबूती देने का काम करता है। साथ ही वात-पित्त को संतुलित रखकर बॉडी को तंदुरुस्त रखता है।

ऐसे करें इस्तेमाल- दातुन के रूप में नीम की टहनी को चबाकर इसे इस्तेमाल में लाया जा सकता है। इसके पत्ते चबाकर भी आप कई रोगों से अपना बचाव कर सकते हैं। स्किन से जुड़ी कोई प्रॉब्लम है तो इसकी पत्तियां को पानी में उबालकर नहाया जा सकता है। इसके साथ ही त्वचा पर इसका पानी भी लगा सकते हैं।

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गिलोय (Giloy)

गिलोय शरीर में संक्रमण और बैक्टीरिया से लड़ने में तो सक्षम है ही साथ ही साथ यह इम्युनिटी को भी बूस्ट करने में मददगार साबित होता है। इसके सेवन से फ्लू और बुखार में तुरंत आराम मिलता है। साथ ही यह पाचन तंत्र के लिए फायदेमंद साबित होता है। गिलोय में गिलोइन, टीनोस्पोरिन, टीनोस्पोरिक एसिड, आयरन, पामेरियन, फास्फोरस, कॉपर, कैल्शियम और जिंक जैसे पोषक तत्त्व मिलते हैं।

ऐसे करें इस्तेमाल – गिलोय के तने को एक गिलास पानी में तब तक उबालें जब तक पानी जलकर आधा न हो जाए। इसके बाद पानी को छान लें और नियमित इसका सेवन करें। गिलोय को दूध में उबालकर पीने से जोड़ों का दर्द कम होता है। गिलोय का रस 10 मिली (एमएल), तुलसी पत्ती का रस 10 एमएल और 50 एमएल एलोवेरा जूस को मिलाकर सुबह खाली पेट सेवन करने भी इसके अनगिनत फायदें उठा सकते हैं।

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हल्दी (Turmeric)

हल्दी में औषधीय गुणों के साथ बायोएक्टिव यौगिक होते हैं। यह एंटीसेप्टिक और जीवाणुरोधी गुणों के कारण मुहांसे, एक्जिमा आदि जैसे त्वचा के रोगों के लिए असरदार साबित होती है। रोजाना हल्दी खाने से रक्त में पाए जाने वाले विषैले तत्व शरीर से बाहर निकलते है। इसके साथ ही यह हड्डियों को भी मजबूती प्रदान करती है।

ऐसे करें इस्तेमाल- हल्दी का सेवन सूप,अंडे की भुर्जी, भुनी हुई सब्जियां,स्मूदी,चावल के साथ किया जा सकता है। इसके साथ ही चाय के साथ भी हल्दी का सेवन लाभकारी है।

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अदरक (Ginger)

भारत के आयुर्वेदिक ग्रंथों में अदरक को सबसे महत्वपूर्ण बूटियों में से एक माना गया है। यह एक शक्तिशाली पाचक की भूमिका निभाता है। बारिश में अदरक का सेवन करने से सर्दी-जुकाम, बुखार, खांसी और पाचन संबंधी समस्याओं से छुटकारा मिलता है। अदरक को जोड़ों के दर्द, मतली को रोकने के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है।

ऐसे करें इस्तेमाल- अदरक का काढ़ा बनाने के लिए एक बर्तन में 2 कप पानी डालकर उसे गर्म होने के लिए रख दें। फिर आप इसमें अदरक, तुलसी के पत्ते, 1 दालचीनी का टुकड़ा और कुछ दाने काली मिर्च के मिला दें। अब इसमें एक चम्मच शहद डाल कर मिला लें। फिर आप इस को कम से कम 5 से 7 मिनट तक उबालें और फिर एक कप में छानकर धीरे-धीरे पियें।

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मानसून में खान-पान में बरतें ये सावधानी 

  • बरसात के मौसम में हरी पत्तेदार सब्जियां जैसे पालक,पत्तागोभी और फूलगोभी खाने से परहेज करें।
  • नॉनवेज खाने से भी दूरी बना कर रखें।
  • इस मौसम में ज्यादा चाय या कॉफी भी आपकी सेहत के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है।
  • इस महीने बाहर का खाना कई बीमारियों को बुलावा दे सकता है।
  • प्रोसेस्ड ड्रिंक कई तरह के संक्रमण फैलाने का काम करेगा।
  • इस मौसम में सर्दी-खांसी जल्दी होती है। ऐसे में कोशिश करें की फ्रीज का ठंडा पानी इस्तेमाल न करें।

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